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Showing posts from October, 2019

आखिर! क्यों होती है चीन में एक भारतीय की पूजा

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आखिर! क्यों होती है चीन में एक भारतीय की पूजा...  31 october 2019 By. Babugautam बोधिधर्मन : चीन के भारतीय भगवान [''भारतीय'' की देन है चीन को मार्शल आर्ट, चिकित्सा और चाय] .............................................. यह प्रमाणित हो चुका है कि एक महान दिव्य भारतीय की ही देन है जो चीन आज मार्शल आर्ट, चिकित्सा पद्धति व चाय का शौक रखता है। उन महान भारतीय का नाम है ''बोधि धर्मन''।          बोधी धर्मन एक महान बौद्ध भिक्षु थे। बोधिधर्म का जन्म दक्षिण भारत के पल्लव राज्य के कांचीपुरम के राज परिवार में हुआ था। वे कांचीपुरम के राजा सुगंध के तीसरे पुत्र थे। छोटी आयु में ही उन्होंने राज्य छोड़ दिया और भिक्षुक बन गए। लगभग 22 साल की उम्र में उन्होंने संबोधि (मोक्ष की पहली अवस्था) को प्राप्त किया। चीन के ग्रंथ कहते हैं कि बोधिधर्म के अथक प्रयासों से ही चीन, जापान और कोरिया में कला, कौशल व बौद्ध धर्म का प्रचार - प्रसार व विस्तार हुआ। 520-526 ई. में चीन पहुंच कर उन्होंने चीन में ध्यान संप्रदाय की नींव रखी जिसे च्यान या झेन ध्यान पद्धति कहते हैं। बोधिधर्म...

देवदासी का अर्थ है देव की दासी अर्थात ईश्वर की रखेल

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देवदासी का अर्थ है देव की दासी अर्थात ईश्वर की रखेल ! दासी एक तरह की ग़ुलाम महिला होती है जिसकी ना कोई स्वतंत्रता है ना कोई मौलिक अधिकार ! भारतीय इतिहास की सभी दासी पराजित राज्य या शूद्र वर्ग की महिलाएं थी ! दासियों का बलात्कार करना, दूसरे राजाओं को उपहार स्वरूप देना, उत्पीड़न शोषण का भयानक इतिहास है जिसपर कभी विस्तार से लिखा नही गया ! ज्यादातर इतिहास ब्राह्मण सनातन संस्कृति के शासन को  महान और उचित ठहराने के नजरिये से लिखा गया है ! दासियों को बेचने वाले खरीदने वाले उपहार के रूप में देने स्वीकार करने वालों को ईश्वर भगवान का दर्जा देकर इनकी शान में कसीदे पढें गए है ! सदियों से मंदिरों में बच्चियों को देवदासी बनाकर ब्राह्मण पुरोहित बलात्कार करते, प्रौढ़ होने पर वैश्यालय में बेच दिया जाता ! मंदिरों की पुरानी व्यवस्था पर शोध अध्ययन कर नया इतिहास लिखना होगा, मंदिर पूजा घर नही वैश्यालय था ! आज उसी मंदिरों में प्रवेश के लिए शूद्र महिलाएं लाठी डंडे खाने को भी राजी हैं ! (थाईलैंड की देवदासी पीठ पर गोदकर लिखा है देवदासी है किस मंदिर की है और इससे बलात्कार करने का अधिकार क...

प्रधानमंत्री मोदी के केवड़िया दौरे से पहले,आदिवासी नेता नजरबंद

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Samachar bhartiy >  गुजरात  >  प्रधानमंत्री मोदी के केवड़िया दौरे से पहले,आदिवासी नेता नजरबंद प्रधानमंत्री मोदी के केवड़िया दौरे से पहले,आदिवासी नेता नजरबंद By  Babu gautam  - October 31, 2019 5 विशाल मिस्त्री, राजपिपला:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मौजूदगी में 31 अक्टूबर यानी कल गुजरात के नर्मदा जिला में मौजूद केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाएगा. इस दिन आदिवासी समाज के लोग विरोध ना कर सकें इसके लिए पुलिस का चुस्त बंदोबस्त किया गया और आठ हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. ऐसे में नर्मदा जिला के अलग-अलग आदिवासी संगठन मोदी के प्रोग्राम का विरोध कर कल केवड़िया बंद का ऐलान किया है जिसकी वजह से प्रसाशन हरकत में आते हुए कई आदिवासी नेताओं को हिरासत में ले लिया है. इंडिजिन्स आर्मी ऑफ इंडिया के संस्थापक और आदिवासी नेता डॉक्टर प्रफुल्ल वसावा ने इस सिलसिले में जानकारी देते हुए कहा कि कल केवड़िया को बंद रखने का फैसला किया गया है. 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस की जगह पर आदिवासी समाज क...

रामायण महाभारत सब काल्पनिक कहानियां हैं इतिहास नहीं, यह बात सुप्रिम कोर्ट ने भी माना है।

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रामायण महाभारत सब काल्पनिक कहानियां हैं इतिहास नहीं, यह बात सुप्रिम कोर्ट ने भी माना है। न कभी सतयुग, द्वापरयुग त्रेतायुग था और न ही कोई ब्राह्मा, विष्णु, शंकर ,राम ,कृष्ण ,हनुमान, रावण आदि पैदा हुए, ये सब ब्राह्मणों की लिखी काल्पनिक कहानियों के काल्पनिक पात्र हैं वैसे ही जैसे स्पाइडर मैन और शक्तिमान जैसी कहानियां हैं। मानव सभ्यता के विकास का इतिहास पढ़िए, मानव कब तक जंगलों में शिकार करके कच्चा मांस खाकर जीवित रहा, कब आग का आविष्कार करके मांस भूनकर खाने लगा, कब से खेती करने लगा, कब पत्तों से तन ढकना शुरू किया कब कपड़े का आविष्कार हुआ, कब लोहा, तांबा, पीतल, सोना, चांदी आदि धातुओं की खोज हुई, कब मानव ने लिखना-पढ़ना शुरू किया कब कागज का आविष्कार हुआ सब कुछ पूरे विश्व के इतिहास में दर्ज है और यह सब कुछ हजार साल पहले का इतिहास है जो पुरातात्विक सबूतों का अध्ययन करके लिखा गया है यह सत्य है या ब्राह्मणों के लिखे निराधार कपोल कल्पित सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग की कथित लाखों साल पहले की कहानियां? जिन्हें वे इतिहास बताते हैं तर्कशील बनिए बच्चों को भी तर्कशील बनाइए। जब से लोहे की खोज हुई ...

Bhimarmy

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